देहरादून, उत्तराखंड में आबकारी नीति के तहत नई शराब दुकानों को खोलने और उनके संचालन से जुड़े नियमों को लागू करने की प्रक्रिया के बीच अब विरोध के स्वर तेज होते जा रहे हैं। खास बात यह है कि यह विरोध आम जनता की ओर से कम और शराब कारोबार से जुड़े कुछ पुराने ठेकेदारों की ओर से अधिक बताया जा रहा है, जो अपनी स्थापित दुकानदारी पर खतरा महसूस कर रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक, राज्य सरकार द्वारा बनाई गई नई योजनाओं के तहत आबकारी विभाग शराब दुकानों के लाइसेंस वितरण और उनके संचालन को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने की दिशा में काम कर रहा है। इसके तहत कई नए क्षेत्रों में दुकानों के आवंटन की प्रक्रिया चल रही है, जिससे प्रतिस्पर्धा बढ़ना तय है। लेकिन यही बात कुछ पुराने ठेकेदारों को रास नहीं आ रही है।
बताया जा रहा है कि कुछ व्यापारी अपनी दुकानों के एक-दो किलोमीटर के दायरे में खुलने वाली नई दुकानों का विरोध करवाने के लिए स्थानीय लोगों को प्रलोभन दे रहे हैं। कहीं सामाजिक ताने-बाने का हवाला दिया जा रहा है तो कहीं युवाओं पर पड़ने वाले असर को मुद्दा बनाकर विरोध प्रदर्शन खड़े किए जा रहे हैं। हालांकि, अंदरखाने यह चर्चा भी जोरों पर है कि इन विरोधों के पीछे असल वजह केवल व्यापारिक हितों की रक्षा है।
स्थिति की विडंबना यह है कि जिन व्यापारियों द्वारा विरोध कराया जा रहा है, वही व्यापारी लंबे समय से आबकारी विभाग के साथ कारोबार करते आ रहे हैं। एक ओर वे विभागीय नीतियों का लाभ उठाकर मुनाफा कमा रहे हैं, तो दूसरी ओर उन्हीं नीतियों की आलोचना कर रहे हैं। इससे विभाग की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं, लेकिन विभाग अब इस दोहरी भूमिका को लेकर सतर्क हो गया है।
आबकारी विभाग के सूत्रों का कहना है कि ऐसे मामलों पर लगातार नजर रखी जा रही है। जिन लोगों द्वारा सुनियोजित तरीके से विरोध करवाया जा रहा है, उनकी गतिविधियों की जानकारी जुटाई जा रही है। विभागीय स्तर पर यह भी संकेत मिले हैं कि यदि किसी के खिलाफ साक्ष्य मिलते हैं तो सख्त कार्रवाई की जाएगी, जिसमें लाइसेंस निरस्त करने तक के कदम शामिल हो सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि राज्य में शराब कारोबार लंबे समय से कुछ सीमित लोगों के नियंत्रण में रहा है, जिससे एक तरह का एकाधिकार बन गया था। नई नीति के जरिए सरकार इस एकाधिकार को तोड़ने और अधिक प्रतिस्पर्धा लाने की कोशिश कर रही है। लेकिन इस बदलाव के खिलाफ स्वाभाविक रूप से उन लोगों का विरोध सामने आ रहा है, जो वर्षों से इस व्यापार पर पकड़ बनाए हुए थे।
वहीं, स्थानीय प्रशासन भी इस मामले में सतर्क नजर आ रहा है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी प्रकार का विरोध यदि कानून व्यवस्था को प्रभावित करता है, तो उस पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि नई दुकानों का संचालन पूरी तरह से नियमों के तहत हो और आम जनता को किसी तरह की असुविधा न हो।
कुल मिलाकर, देहरादून में शराब दुकानों को लेकर चल रहा यह विवाद अब केवल व्यापारिक प्रतिस्पर्धा तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रशासनिक सख्ती और पारदर्शिता की परीक्षा भी बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में विभाग की कार्रवाई और नीति का क्रियान्वयन इस पूरे मामले की दिशा तय करेगा।

