भारत के महापंजीयक द्वारा जारी नए निर्देशों के अनुसार, जनगणना कार्य में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और इसमें सहयोग न करने वाले नागरिकों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जनगणना अधिनियम 1948 के तहत न केवल आम जनता की जवाबदेही तय की गई है, बल्कि ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों के लिए भी कड़े दंड का प्रावधान है। इसका मुख्य उद्देश्य जनगणना की प्रक्रिया को पूरी ईमानदारी और सटीकता के साथ संपन्न करना है।
अधिकारी और कर्मचारियों के लिए सख्त सजा
यदि कोई जनगणना अधिकारी अपने कर्तव्यों का पालन करने से इनकार करता है, काम में लापरवाही बरतता है या जानबूझकर गलत डेटा तैयार करता है, तो उसे तीन साल तक की जेल और जुर्माना हो सकता है। इसके अलावा, बिना सरकारी अनुमति के जनगणना की जानकारी लीक करने या दस्तावेजों में हेराफेरी करने पर भी सख्त सजा का प्रावधान है।
आम जनता के लिए नियम और जुर्माना
जनगणना के दौरान आम नागरिकों के लिए भी कुछ नियम अनिवार्य हैं। यदि कोई व्यक्ति जनगणना अधिकारी के सवालों का जानबूझकर गलत जवाब देता है या जानकारी देने से मना करता है, तो उस पर 1,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलावा, घर में अधिकारी के प्रवेश को रोकना या जनगणना के लिए लगाए गए नंबरों और चिह्नों को मिटाना भी दंडनीय अपराध माना जाएगा।
महत्वपूर्ण तिथियां और डिजिटल प्रक्रिया
जनगणना का पहला चरण इसी महीने शुरू होने जा रहा है। नागरिक पोर्टल se.census.gov.in पर जाकर 10 अप्रैल से मकानों की ‘स्व-जनगणना’ (Self-Enumeration) कर सकते हैं। इसके बाद, मकानों का सूचीकरण और गणना का कार्य 25 अप्रैल से 24 मई तक चलेगा।
सरकार का उद्देश्य
जनगणना निदेशालय के अनुसार, इन सख्त नियमों का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि देश की जनसंख्या का सही आंकड़ा सामने आए। अधिकारियों और जनता, दोनों से इस राष्ट्रीय अभियान में पूरी ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ सहयोग करने की अपेक्षा की गई है।

