नैनीताल जिला न्यायालय को 24 घंटे में दो बम धमकी: कटघरे में पुलिस कार्यप्रणाली, 36 घंटे बाद भी नहीं मिला कोई सुराग

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उत्तराखंड के नैनीताल जिला न्यायालय को बीते दो दिनों में बम से उड़ाने की धमकी भरे दो ई-मेल प्राप्त हो चुके हैं, वहीं इन ई-मेल के बाद से पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो चुके हैं| हैरत की बात यह यह है कि नैनीताल जिला न्यायालय की आधिकारिक ई-मेल पर अज्ञात ई-मेल सोर्स से प्राप्त हुई पहली धमकी को 24 घंटे भी नहीं बीते थे कि दोबारा नए ई-मेल पते से एक और धमकी भरा ई-मेल प्राप्त हुआ, इस प्रकार धमकी भरे संदेश ने अत्याधुनिक प्रणाली और त्वरित एक्शन लेने वाली उत्तराखंड पुलिस की दक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं| 24 घंटों से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी पुलिस के लिए ई-मेल सोर्स अभी एक पहेली बना हुआ है और कार्रवाई मात्र मुकदमा दर्ज करने तक ही सिमटी हुई है| लेकिन अब सवाल यह है कि क्या यह धमकियाँ किसी सरफिरे का कारनामा है या फिर इस तरह के संदेश भेज कर पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था और तैयारियों का जायजा लिया जा रहा है| बड़ा सवाल यह भी है कि क्या वास्तव में  देशविरोधी ताकतें इन हरकतों को अंजाम दे रही हैं?

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यूँ तो जिले में हुई किसी भी छोटी-मोटी आपराधिक वारदात का खुलासा करने पर पुलिस अपनी दाद देना नहीं भूलती, खुलासे के बाद अधिकारियों द्वारा पुलिस के इंटरनेट मीडिया अकाउंट के साथ ही तमाम मीडिया साधनों में इसका प्रचार प्रसार कर विभाग की तेज तर्रार कार्यप्रणाली उजागर की जाती है| मगर शहर के जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर को बम से उड़ाने की धमकी दिये जाने के मामले में पुलिस की तेजी और साइबर अपराध से निपटने की विशेषज्ञता शून्य नज़र आती है| बताते चलें कि पहला धमकी भरा ई-मेल सोमवार सुबह को प्राप्त हुआ था, वहीं ठीक 24 घंटे बाद यानी मंगलवार की सुबह को धमकी भरा नया ई-मेल ने अब पुलिस की कार्यप्रणाली को कटघरे में ला दिया है| 

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ना विशेषज्ञता, थाना पुलिस के भरोसे जाँच 

बम धमाके की धमकी के बाद तल्लीताल पुलिस ने कोर्ट कर्मी की तहरीर पर दो मुकदमे दर्ज तो किए हैं लेकिन जांच को लेकर अभी भी संशय बरकरार है| वहीं, इस पूरे मामले के तार एक ही कनेक्शन से जुड़े होने की भी आशंका जताई जा रही है| यहाँ पर सबसे बड़ा सवाल अभी यह है की लगातार दो धमकियाँ मिलने और मामला साइबर अपराध से जुड़ा होने के बावजूद भी ना तो अब तक ना ही इसकी जाँच का जिम्मा साइबर सेल को दिया गया और ना ही एसटीएफ को| इस प्रकार अब प्रशासनिक अमले पर ही नागरिक सुरक्षा और कार्यप्रणाली को लेकर संदेह करना लाजमी हो चुका है, क्योंकि पहली धमकी मिलने के 36 घंटे बीत जाने के बाद भी पुलिस के लिए ई-मेल सोर्स अभी एक पहेली बना हुआ है|

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वहीं, जिला कोर्ट में लगातार दो धमकी भरे संदेशों को लेकर मचे हड़कंप के बीच यह किसी सिरफिरे का कारनामा होने की चर्चा भी आम है। नैनीताल के साथ ही अन्य जिलों में भी एक ही इसी तरह के संदेश से हड़कंप मचा हुआ है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या वाकई यह किसी सिरफिरे का काम है या इस तरह के संदेश प्रसारित कर पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था व इंतजाम परखना तो उद्देश्य नहीं है।