उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में शादियों को लेकर एक चिंताजनक स्थिति सामने आई है। अर्थ एवं सांख्यिकी विभाग की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, जिले में लिंगानुपात (Sex Ratio) में भारी अंतर होने के कारण युवाओं को जीवनसाथी मिलने में बड़ी कठिनाई हो रही है। जहां एक ओर उत्तराखंड नए वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में उभर रहा है, वहीं स्थानीय स्तर पर लड़कियों की संख्या कम होने से हजारों युवा विवाह योग्य आयु पार कर चुके हैं। आंकड़ों के मुताबिक, 25 से 34 साल की उम्र के बीच लड़कों और लड़कियों की संख्या में जमीन-आसमान का अंतर है, जिससे समाज में एक नया संकट खड़ा हो गया है।
चिंताजनक आंकड़े: 3 लड़कों पर सिर्फ 1 लड़की
रिपोर्ट के सबसे चौंकाने वाले आंकड़े बताते हैं कि 25 से 34 साल की उम्र के बीच लगभग 35 हजार से अधिक युवा विवाह का इंतजार कर रहे हैं, जबकि उनके मुकाबले लड़कियों की संख्या मात्र 11,836 है। सरल शब्दों में कहें तो हर 3 लड़कों पर केवल 1 लड़की उपलब्ध है। 30 से 34 साल के आयु वर्ग में स्थिति और भी गंभीर है, जहां 10,103 युवाओं के मुकाबले लड़कियों की संख्या केवल 3,031 रह गई है।
उम्र का बढ़ता आंकड़ा और सामाजिक चुनौतियां
देहरादून में शादी की प्रतीक्षा कर रहे युवाओं में से 7,025 युवा ऐसे हैं जिन्होंने 35 वर्ष की आयु पार कर ली है, और इनमें से भी 3,281 युवक 40 की उम्र पार कर चुके हैं। अक्सर इस समस्या के लिए लड़कियों की बढ़ती अपेक्षाओं को ज़िम्मेदार ठहराया जाता है, लेकिन सांख्यिकी विभाग की रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि असली समस्या समाज में घटता लिंगानुपात है। पहाड़ों से शुरू हुआ यह संकट अब राजधानी तक पहुंच गया है।
बुजुर्गों में बढ़ता अकेलापन
यह संकट केवल युवाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि राजधानी में बड़ी संख्या में बुजुर्ग भी एकाकी जीवन जीने को मजबूर हैं। आंकड़ों के अनुसार, 60 से 80 वर्ष की आयु के बीच लगभग 5,714 पुरुष और 2,968 महिलाएं अकेले रह रही हैं। यह रिपोर्ट समाज में बदलती जनसांख्यिकीय स्थिति और भविष्य में आने वाली सामाजिक चुनौतियों की ओर एक बड़ा इशारा करती है।

