बद्रीनाथ मास्टर प्लान को लेकर राज्य सरकार पर स्थानीय विधायक ने लगाई गंभीर आरोप

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चारधाम यात्रा शुरू होने में अब कुछ ही दिन बाकी हैं… लेकिन तैयारियों को लेकर सियासत तेज हो गई है। बद्रीनाथ से कांग्रेस विधायक लखपत सिंह बुटोला ने सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि ज़मीनी हकीकत और सरकारी दावों में बड़ा अंतर है।

बद्रीनाथ विधायक लखपत सिंह बुटोला ने बताया कि 5 अप्रैल को वे खुद बद्रीनाथ धाम का दौरा कर लौटे हैं। उनके मुताबिक, प्रधानमंत्री की निगरानी में चल रहे मास्टर प्लान के बावजूद 40 से 50 प्रतिशत काम अभी भी अधूरा है। बुटोला ने आरोप लगाया कि चारधाम यात्रा को लेकर होने वाली समीक्षा बैठकों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों और विधायकों को नहीं बुलाया जाता, जिससे ज़मीनी समस्याएं सामने ही नहीं आ पातीं।

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विधायक ने बद्रीनाथ में चल रहे मास्टर प्लान पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि अलकनंदा नदी की चौड़ाई करीब 3 मीटर तक कम कर दी गई है, जिससे नदी का प्राकृतिक प्रवाह प्रभावित हो रहा है। जिससे आसपास के मंदिरों को खतरा उत्पन्न हो गया है, उन्होंने यह भी कहा कि नदी की चौड़ाई कम होने से स्थानीय व्यापारियों और आबादी पर भी खतरा मंडरा रहा है।

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वहीं, मंदिर के आसपास तीन साल पहले तोड़े गए पुरोहितों के घर आज भी खंडहर बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी भी निर्माण कार्यों को लेकर नाराज हैं और अब युद्ध स्तर पर काम करने की जरूरत है। चारधाम यात्रा व्यवस्थाओं को लेकर विधायक ने सरकार के सामने 13 सूत्रीय मांगें रखी हैं। इनमें प्रमुख हैं— यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या निर्धारण खत्म करना, ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन हमेशा खुला रखना, ड्राइवरों के लिए ग्रीन कार्ड 6 महीने का करना, ऋषिकेश से बद्रीनाथ तक बैरिकेडिंग कम करना वहीं होटल व्यवसायियों को कमर्शियल गैस नहीं मिलने से भी परेशानी बढ़ रही है।

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ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि यात्रा शुरू होने से पहले क्या सरकार इन खामियों को दूर कर पाएगी… या फिर इस बार भी श्रद्धालुओं को अव्यवस्थाओं का सामना करना पड़ेगा।

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