गैरसैंण में बजट सत्र के चौथे दिन एलपीजी गैस का सवाल गैस बनकर ऐसा लीक हुआ कि विपक्ष की बयानो वाली दियासलाई ने सदन को तपिश से गर्मा दिया. दरअसल इजराइल-इरान के बीच जंग कितनी लंबी चलेगी अभी कुछ कहा नहीं जा सकता, लिहाजा युद्ध के बीच हालातों के बीच जहां कुछ देश सीधे-सीधे झुलस रहे हैं वहीं भारत जैसे देश बिना युद्ध में हिस्सा लिए ही झुलस रहे हैं। घरेलू गैस की आपूर्ति पर असर दिख रहा है. एलपीजी गैस के कॉमर्शियल सिलेंडर की आपूर्ति लगभग ठप्प ही है, जबकि घरेलू गैस सिलेंडर के लिए कुछ नियम कायदे तय कर दिए गए हैं। हालांकि सरकार इसे ऐहतियातन उठाया गया कदम बता रही है, लेकिन रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को, अब तक देख रही दानिशमंद जनता के माथे पर फिक्र की लकीरे उभर गई हैं.
ऐसे माहौल में गैरसैंण बजट सत्र के दौरान विपक्ष ने जनता की रसोई से जुडा मसला उठाया. विपक्ष का आरोप था कि आपदा को अवसर समझने वाले कालाबाजारी पर उतर आए हैं जिसका खामियाजा वो जनता उठा रही है जिसका कोई दोष ही नहीं है। आलम ये है कि होटल रेस्टोरेंट चलाने वाले कारोबारी निराश हैं उनके सामने रोजी-रोटी का संकट मंडराने लगा है। हॉस्टल चलाने वाले गैस की किल्लत से परेशान हैं। जबकि सरकारी इंतजाम क्या है किसी को खबर नहीं है. जो दिख रहा है उससे अफवाहों का बाजार गर्म हो रहा है अफरातफरी का माहौल बन गया है। जबकि सरकार बेफिक्र दिखाई दे रही है।
विपक्ष के आरोपो को सरकार ने सिरे से खारिज किया. सरकार ने कहा कि पूरे इंतजाम है हालांकि माहौल को देखते हुए इन्हें किफायत से खर्च करने की व्यवस्था की गई है और विकल्प भी तलाशे गए हैं। जिस पर विपक्ष की ओर से सीधा सवाल किया गया कि क्या घरेलू गैस का विकल्प जलौनी लकड़ी हो सकती है। हालांकि देखा जाए तो मौजूदा वक्त मे जब घरों में मॉड्यूलर किचन हों वहां घरेलू गैस के विकल्प के तौर पर लकड़ी जलाई ही नहीं जा सकती। लिहाजा विपक्ष के इस सवाल पर कोई भी सहमत नहीं हो सकता क्योंकि संकट वैश्विक है.. लेकिन कहते हैं दुर्भिक्षम किम न करोति पापम्..हालात तकरीबन दुर्भिक्ष वाले ही हैं, ऐसे में अगर लकड़ी जलाकर दो जून भोजन का इंतजा करना भी पड़ जाए तो कोई आफत नहीं आ जाएगी. क्योंकि डूबते को तिनके का सहारा भी काफी होता है । तय है कि अगर सरकार जलौनी लकड़ी का वैकल्पिक इंतजाम करती है तो उसका स्वागत होना चाहिए क्योंकि जिंदगी को भोजन की जरूरत होगी फिर वो चाहे गैस में बने या लकड़ी में। हालांकि विपक्ष की उस चिंता को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता जहां कालाबाजारी मुनाफे का सबब बन सकती है। लिहाजा सरकार को जनहित में सजग रहना होगा ताकि आफत किसी के लिए चांदी काटने का अवसर न बन सके।

