चुनावी साल में ऊधमसिंह नगर में सियासी घमासान, पत्र से मचा भूचाल, विधायक अरविंद पांडे पर गंभीर आरोप… सुनिए क्या कहा शिकायतकर्ता ने..

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उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। उधमसिंह नगर जनपद के गदरपुर क्षेत्र से जुड़ा एक पत्र सामने आने के बाद सत्ताधारी दल और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। यह पत्र ग्राम भद्रा मुनी, सकनिया हाल निवासी भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता सुरजीत सिंह द्वारा सीएम और जिलाधिकारी को भेजा गया है, जिसमें गदरपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक अरविंद पांडे पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
पत्र में आरोप लगाया गया है कि विधायक अरविंद पांडे न केवल पार्टी और सरकार की छवि को नुकसान पहुंचा रहे हैं, बल्कि प्रशासनिक तंत्र का दुरुपयोग कर ईमानदार अधिकारियों को निशाना बनाया जा रहा है। शिकायतकर्ता का कहना है कि विधायक द्वारा बार-बार ऐसे बयान दिए जा रहे हैं, जिनसे जनता में भ्रम की स्थिति बन रही है और सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े हो रहे हैं। पत्र में यह भी उल्लेख है कि विधायक कांग्रेस नेताओं के साथ मिलकर भारतीय जनता पार्टी और राज्य सरकार को बदनाम करने का प्रयास कर रहे हैं। शिकायत में यह भी कहा गया है कि किसान आंदोलन के दौरान और विभिन्न अवसरों पर विधायक द्वारा दिए गए बयान राष्ट्रीय स्तर पर सरकार की छवि को ठेस पहुंचाने वाले रहे हैं। पत्र में यह आरोप लगाया गया है कि विधायक अपने राजनीतिक हितों के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक की छवि को नुकसान पहुंचाने से नहीं चूक रहे हैं। शिकायतकर्ता ने इसे सुनियोजित साजिश करार दिया है।
पत्र में पुलिस प्रशासन को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि कुछ ईमानदार पुलिस अधिकारियों को झूठे आरोपों में फंसाने की कोशिश की गई, जबकि भ्रष्ट और संदिग्ध अधिकारियों को संरक्षण दिया जा रहा है। शिकायतकर्ता ने यह भी सवाल उठाया है कि गोपनीय दस्तावेज और आंतरिक जानकारियां कैसे सार्वजनिक हो रही हैं, जिससे पूरे सिस्टम की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लग रहा है।
शिकायतकर्ता का कहना है कि वर्ष 2020 में भी इस पूरे प्रकरण से जुड़े मामलों को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय तक शिकायत भेजी गई थी, लेकिन राजनीतिक दबाव के चलते उस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी। अब एक बार फिर राज्यपाल से मांग की गई है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, ताकि सच सामने आ सके और दोषियों पर कार्रवाई हो।
इस पत्र के सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। विपक्ष जहां इसे सरकार के भीतर की अंदरूनी कलह बता रहा है, वहीं भाजपा खेमे में भी इस शिकायत को लेकर असहजता देखी जा रही है। अब सबकी निगाहें सरकार और जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वे इस शिकायत पर क्या रुख अपनाते हैं और क्या वाकई इस पूरे मामले में किसी बड़े खुलासे की नींव पड़ने वाली है।