डीएम बनवाने के लिए खबरनवीस पहनवा रहा अधिकारियों को नव रत्नों की अंगूठी….. ज्योतिष के फेर में लगे अधिकारी…

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देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में एक बार फिर तबादलों का जिन बाहर निकलने को बेताब नजर आ रहा है। शासन स्तर पर संभावित तबादला सूची की चर्चाओं के बीच इस बार एक हैरान करने वाला पहलू सामने आया है। जिलाधिकारी (डीएम) बनने की होड़ में शामिल कुछ अधिकारी अब प्रशासनिक योग्यता, अनुभव या सेवा रिकॉर्ड से अधिक ग्रह-नक्षत्रों और ज्योतिषीय उपायों पर भरोसा करते दिख रहे हैं। हालात ऐसे बन गए हैं कि कई अधिकारी ज्योतिषाचार्यों और बाबाओं की शरण में पहुंच गए हैं, ताकि उनकी किस्मत का ताला खुल सके।
सूत्रों के अनुसार, राजधानी में सक्रिय एक खबर नवीस इन दिनों खासा चर्चा में है। आरोप है कि वह न केवल शासन-प्रशासन की अंदरूनी सूचनाओं तक पहुंच का दावा करता है, बल्कि अधिकारियों को एक कथित बाबा से भी मिलवा रहा है। यह बाबा डीएम बनने की लालसा रखने वाले अधिकारियों को “आशीर्वाद” देने के साथ-साथ उनके भविष्य उज्ज्वल होने का भरोसा दिला रहा है। बताया जा रहा है कि इस पूरे खेल में ज्योतिषाचार्य भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं, जो अधिकारियों की कुंडली देखकर ग्रहों की दशा सुधारने के उपाय सुझा रहे हैं।
ग्रहों के इस गणित में अंगूठियों का खास महत्व बताया जा रहा है। किसी अधिकारी को पुखराज धारण करने की सलाह दी गई है तो किसी को मूंगा पहनने को कहा गया है। कुछ अधिकारी ऐसे भी हैं जिन्होंने एक से अधिक रत्न धारण कर लिए हैं, ताकि किसी भी तरह से डीएम बनने का मार्ग प्रशस्त हो सके। चर्चाएं यहां तक हैं कि कुछ अधिकारियों ने रत्नों की शुद्धता और वजन तक पर भारी रकम खर्च की है, क्योंकि उन्हें बताया गया कि “गलत रत्न” पहनने से पद की बजाय पदावनति भी हो सकती है।
इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासनिक हलकों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या राज्य की शीर्ष प्रशासनिक जिम्मेदारियों तक पहुंचने का रास्ता अब मेहनत और ईमानदारी की जगह ज्योतिषीय उपायों से होकर गुजर रहा है? यदि अधिकारी खुद अपने भविष्य को ग्रह-नक्षत्रों के भरोसे छोड़ रहे हैं, तो शासन व्यवस्था की गंभीरता पर सवाल उठना लाजिमी है। जानकारों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब तबादलों के समय ऐसे किस्से सामने आए हों, लेकिन इस बार मामला इसलिए गंभीर है क्योंकि इसमें कथित तौर पर एक खबर नवीस की भूमिका भी सामने आ रही है।
प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि तबादलों को लेकर अनिश्चितता और गोपनीयता की कमी ऐसी अफवाहों और अंधविश्वासों को जन्म देती है। जब अधिकारियों को यह भरोसा नहीं होता कि चयन पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष होगा, तब वे वैकल्पिक रास्तों की तलाश करने लगते हैं। वहीं कुछ वरिष्ठ अधिकारी इसे महज “मानसिक दबाव” का परिणाम बता रहे हैं, जिसमें लोग किसी भी सहारे को अपनाने के लिए तैयार हो जाते हैं।
फिलहाल, तबादलों की आधिकारिक सूची का इंतजार है। लेकिन उससे पहले ही देहरादून के प्रशासनिक गलियारों में रत्नों की चमक और बाबाओं के आशीर्वाद की चर्चाएं तेज हो चुकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि ग्रह-नक्षत्रों पर भरोसा करने वालों की उम्मीदें कितनी पूरी होती हैं, या फिर अंतत: वही अधिकारी सफल होते हैं जिनका रिकॉर्ड और कार्यशैली मजबूत है।