उत्तराखंड में सुधर रही है गंगा की सेहत, नमामि गंगे का दिख रहा असर

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ये सिर्फ उत्तराखंड के लिए नहीं बल्कि हर उस भारतीय के लिए राहत भरी खबर है कि जिसकी गंगा पर आस्था है। दरअसल केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने उत्तराखंड में गंगा नदी को अब अप्रदूषित की श्रेणी में रख दिया है। जल गुणवत्ता रिपोर्ट 2025 बता रही है कि नमामि गंगे मिशन के कदम धीरे-धीरे मंजिल की ओर जाने लगे है । सीपीसीबी की रिपोर्ट के मुताबिक उत्तराखंड में, गंगा नदी में बायोकैमिकल ऑक्सीजन डिमांड (BOD) का स्तर, स्वस्थ नदी के लिए तय किए मानको के अनुरूप पाया गया है। उत्तराखंड में गंगा नदी के पानी में BOD 3एम.जी. प्रति लीटर से कम है।

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जबकि घुलित ऑक्सीजन का स्तर भी सभी जलीय जीव जंतुओं के लिए पूरी तरह सुरक्षित पाया गया है। यानि कहा जा सकता है कि नमामि गंगे मिशन के प्रोजेक्ट उत्तराखंड में अपना असर दिखा रहे हैं। अब तक नमामि गंगे की 37 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं और गंगा को साफ रखने के लिए 50 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाए जा चुके हैं। जो गंगा में गंदे पानी को सीधा जाने से रोकते हैं। इतना ही नहीं सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की निगरानी गंगा पल्स पोर्टल के जरिए रियल टाइम पर हो रही है ताकि गंदा पानी गंगा की सेहत न बिगाड़ पाए। काबिलेगौर बात ये है कि राज्य में सीवेज ट्रीटमेंट की क्षमता में दस गुना इजाफा हुआ है। गंगा में गिरने वाले 170 नालों मे से 155 नालों नालों को टैप कर दिया गया है।

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जबकि बचे 15 नालों के लिए 11 नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लाट का निर्माण जारी है। तय है कि आने वाले वक्त में उत्तरांखंड में बहती गंगा नहाने के लिए साफ मिलेगी और आचमन के लिए शुद्ध। वहीं 2027 के कुंभ में दूर दूर से आए श्रद्धालु गंगा के निर्मल पानी में आस्था की डुबकी लगाएंगे।