उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अपने हालिया ‘सियासी अवकाश’ वाले बयान से उपजे विवादों पर विराम लगा दिया है। एक भावुक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका मकसद केवल नए कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहित करना और पार्टी में धैर्य बनाए रखने का संदेश देना था। रावत ने अपने विरोधियों को कड़ा जवाब देते हुए कहा कि जब भी चुनावी ‘युद्ध’ शुरू होगा, वे पूरी ताकत के साथ मैदान में नजर आएंगे। उनका लक्ष्य स्वयं चुनाव लड़ना नहीं, बल्कि पार्टी की जीत सुनिश्चित करना है।
पार्टी की विजय के लिए ‘ढोल’ बजाएंगे रावत
पूर्व मुख्यमंत्री ने साफ किया कि वे आगामी चुनावों में खुद उम्मीदवार बनने के बजाय पार्टी के प्रचार-प्रसार की कमान संभालेंगे। उन्होंने प्रतीकात्मक रूप से कहा कि वे कांग्रेस का ‘ढोल’ बजाकर जीत सुनिश्चित करने का काम करेंगे। रावत ने जोर देकर कहा कि वे वर्षों के अपने अनुभव का लाभ पार्टी को देना चाहते हैं और किसी भी कीमत पर संगठन पर बोझ नहीं बनना चाहते, लेकिन गलत होने पर चुप भी नहीं रहेंगे।
परिवारवाद के आरोपों पर तीखा पलटवार
हरीश रावत ने उन पर लग रहे परिवारवाद के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने तर्क दिया कि उनके बच्चों ने हमेशा उन कठिन सीटों से चुनाव लड़ा है, जहाँ कांग्रेस दशकों से नहीं जीती थी। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि 2017 और 2022 की विपरीत लहरों के बावजूद उत्तराखंड में कांग्रेस ने अपना वोट प्रतिशत मजबूती से बनाए रखा, जो उनकी रणनीति और कार्यकर्ताओं की मेहनत का परिणाम है।
पार्टी हित में किसी भी भूमिका के लिए तैयार
रावत ने संदेश दिया कि उनका एकमात्र लक्ष्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनाना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे राज्य इकाई के निर्देशानुसार किसी भी भूमिका में सेवा देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से एकजुट होकर चुनावी रण में उतरने का आह्वान किया ताकि पार्टी को फिर से सत्ता में लाया जा सके।

