देहरादून का डीएवी डिग्री कॉलेज हमेशा से सुर्खियों में रहा है। कभी ये सीना चौड़ी करने वाली सुर्खियां बटोरता था, लेकिन जैसे जैसे संचार साधनो का रंग रूप बदला दुनिया मुट्ठी में आई डीएवी कॉलेजी की रंगत भी बदलने लगी। छात्र संघ समारोह हमेशा हुए लेकिन इस बार के छात्र के संघ समारोह में हुई घटना ने डीएवी कॉलेज पर सवालिया निशान लगा दिया है। आम से लेकर खास तक हर कोई कोसता हुआ दिखाई दे रहा है। डीएवी के पुराने छात्र हों या पुराने छात्र नेता सभी को डीएवी कॉलेज का बदलता रंग-रूप अखरा रहा है।
प्रतिष्ठित कॉलेज की प्रतिष्ठा पर एक कलाकार दाग लगा कर चला जाए किसी को रास नहीं आ रहा है। फिर चाहे मीडिया प्रतिनिधि हो या फिक जननेता सभी को मासूम शर्मा के आयोजित शो के दौरान मंच से गाली-गलौज भीतर तक छलनी कर गया है। यमुनोत्री के विधायक संजय डोभाल ने अपनी फेसबुक वॉल पर अपनी भावनाओं का इजहार करते हुए एक लंबी पोस्टी टांगी है। जिसमें उन्होंने जहां उस रोज घटी घटना पर न केवल अफसोस जाहिर किया है बल्कि चिंता जाहिर भी की है कि उत्तराखंड का समाज मासूम मासूम है जो बढ़ते हुए गन और गाली कल्चर से जूझने को मजबूर हो रहा है।
कई सवाल उठाते हुए यमुनोत्री विधायक ने कहा है कि हम छात्र संघ समारोह में अपनी स्थानीय संस्कृति की जड़ों को क्यों नहीं मजबूत करते। अपने स्थानीय कलाकारों को मंच क्यों नहीं देते। डोभाल का मानना है कि डीएवी कॉलेज के मंच पर हुई छीछालेदर हमारी सांस्कृतिक विरासत के लिए एक चुनौती है। डोभाल ने बेहद गंभीर चिता करते हुए लिखा है, कि तेजी से बढ़ता यह गन और गाली कल्चर न केवल समाज के लिए चिंता का विषय है, बल्कि हमारी आने वाली पीढ़ी के भविष्य के लिए भी खतरा बनता जा रहा है। किसी भी समाज का पतन वहीं से शुरू होता है, जब लोग अपनी जड़ों और अपनी संस्कृति को भूलने लगते हैं।
डोभाल जी की बात तो संजीदा है। लेकिन असल सवाल है भाजपा के छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की चेतना, चरित्र और चिंतन का, जिसने अपना मूल ध्येय वाक्य ज्ञान, चरित्र, एकता, परिषद की विशेषता के बोर्ड को कहीं स्टोर रूम में रख दिया है। तय है कि आज अगर स्वामी विवेकानंद जिंदा होते तो डीएवी देहरादून के छात्र संघ समारोह को देखकर अफसोस जाहिर कर रहे होते।

