उत्तराखंड सरकार ने राज्य के पूर्व सैनिकों और चार साल की सेवा पूरी कर लौटे अग्निवीरों के लिए स्वरोजगार का एक बड़ा अवसर खोला है। सरकार ने ‘मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना 2.0’ के तहत कुल वार्षिक लक्ष्य में 10% कोटा इन वीर जवानों के लिए आरक्षित कर दिया है। इस योजना के जरिए न केवल उन्हें अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए प्राथमिकता मिलेगी, बल्कि विनिर्माण (Manufacturing) और अन्य क्षेत्रों में काम शुरू करने के लिए सरकार की ओर से अतिरिक्त वित्तीय सहायता यानी सब्सिडी भी दी जाएगी। साल 2030 तक इस मद में लगभग 6.84 करोड़ रुपये खर्च करने का लक्ष्य रखा गया है।
सब्सिडी का बड़ा लाभ और वीर उद्यमी योजना
सरकार ने जवानों को उद्यमी बनाने के लिए ‘वीर उद्यमी योजना’ शुरू करने का फैसला लिया है। यदि कोई पूर्व सैनिक या अग्निवीर विनिर्माण क्षेत्र में 10 से 20 लाख रुपये तक का प्रोजेक्ट शुरू करता है, तो सरकार पर्वतीय क्षेत्रों में 20% और मैदानी क्षेत्रों में 15% की सब्सिडी देगी। इसके अलावा, इन्हें 5% अतिरिक्त ‘बूस्टर’ सब्सिडी भी दी जाएगी, जिससे उनका आर्थिक बोझ काफी कम हो जाएगा।
इन व्यवसायों के लिए मिलेगी मदद
इस योजना के तहत पूर्व सैनिक और अग्निवीर कई तरह के सूक्ष्म और लघु व्यवसाय शुरू कर सकते हैं। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
- फल-सब्जी विक्रेता, फास्ट फूड, चाय और बेकरी।
- मोबाइल रिपेयरिंग, प्लंबर, टेलर और ब्यूटी पार्लर।
- मशरूम की खेती, डेयरी उद्योग और फूलों का कारोबार।
- कार वाशिंग, मशीन रिपेयरिंग और अगरबत्ती निर्माण।
निवेश के आधार पर अनुदान (Subsidy)
मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत सालाना 10 हजार लोगों को लाभान्वित करने का लक्ष्य है। निवेश राशि के आधार पर सब्सिडी को इस तरह बांटा गया है:
- पर्वतीय क्षेत्रों में: 2 लाख तक के निवेश पर 30%, 2 से 10 लाख पर 25% और 10 से 20 लाख के निवेश पर 20% सब्सिडी मिलेगी।
- अतिरिक्त लाभ: पूर्व सैनिकों और अग्निवीरों को हर कैटेगरी में 5% की एक्स्ट्रा सब्सिडी दी जाएगी।

