109 बंद शराब की दुकानों के लिए सरकार को मंथन की जरूरत

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राज्य सरकार जहां सरकारी खजाने को भरे जाने को लेकर मंथन और कार्य योजनाए बना रही है वही आबकारी विभाग सरकार की तमाम योजनाओं और मंशाओं के ऊपर पलीता लगाने का काम कर रहा है। राज्य में बंद पड़ी शराब 131 दुकानों में से महज 22 ही दुकानों को खुलवाया जा सका है वहीं 109 बंद दुकानों को लेकर कौन जिम्मेदार ये सवाल भी उठ रहे है। सरकार की तरफ से शराब की दुकानों के आवंटन को लेकर कैबिनेट बैठकों में मंथन किए गए। लेकिन आबकारी विभाग के अधिकारियों को राज्य की माली हालत तक भी दिखाई नही दे रही जिससे राज्य की बन्द दुकानों को खुलवाने में वो गंभीरता दिखाते और सरकारी खजाने को भरे जाने में अपनी जिम्मेदारी निभाते। कोरोना काल मे सरकार का खजाना खाली हो रहा है लेकिन अधिकारी आज भी पुराने ढर्रे पर ही चल रहे है। गौरतलब है कि सरकार के द्वारा टैंडर के जरिए इस बार दुकानों के आवंटन की प्रक्रिया को अपनाया गया था जिसमें राज्यभर की 131 दुकानों के लिए लगभग 60 आवेदन प्राप्त हुए थे लेकिन ऊधमसिंह नगर की 25 और बागेश्वर की 4 दुकानों के लिए एक भी आवेदन प्राप्त नही हुआ था जो एक बड़ी चिंता का विषय भी है। आखिरकार जनपदों में बैठे अधिकारी किस कार्य योजना के तहत काम कर रहे है इसकी समीक्षा करने के साथ सरकार को ऐसे अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय करने की जरूरत है जिससे सरकार का खजाना अपने टारगेट के अनुरूप पूरा किया जा सके।