उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और दिग्गज कांग्रेस नेता हरीश रावत ने राजनीति के बीच अब अध्यात्म की ओर रुख करने का मन बनाया है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी दी है कि आगामी 27 अप्रैल को वह अपनी जन्मभूमि मोहनरी जाएंगे और वहां अपने इष्ट देवता की शरण में रहेंगे। रावत का यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब वह पार्टी के भीतर कुछ मुद्दों को लेकर ’15 दिन के अवकाश’ पर चल रहे हैं। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया है कि संघर्ष उनकी आदत है और सच उनकी ताकत।
राजनीतिक हलचल और 15 दिन का अवकाश
हरीश रावत के इस अवकाश ने कांग्रेस खेमे में काफी बयानबाजी और चर्चाएं छेड़ दी हैं। बताया जा रहा है कि वर्ष 2022 में रामनगर से निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले संजय नेगी को कांग्रेस में शामिल न किए जाने के फैसले से नाराज होकर रावत ने 15 दिन की छुट्टी का ऐलान किया था। वर्तमान में उत्तराखंड के दौरे पर आईं प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा के कार्यक्रमों से भी रावत ने फिलहाल दूरी बनाई हुई है, जिससे राजनीतिक गलियारों में उनके अगले कदम को लेकर सस्पेंस बना हुआ है।
जन्मभूमि जाने से पहले उठाएंगे अहम मुद्दे
अपनी जन्मभूमि के लिए रवाना होने से पहले हरीश रावत प्रदेश की वर्तमान स्थितियों पर मुखर रहेंगे। उन्होंने कहा है कि वह उत्तराखंड के आपदा ग्रस्त क्षेत्रों की वर्तमान स्थिति और राज्य की शराब नीति पर अपनी बात रखेंगे। हालांकि, अध्यात्म के लिए जाने के बाद वह दोबारा पार्टी के काम पर कब लौटेंगे, इस सवाल पर उन्होंने फिलहाल चुप्पी साध रखी है।
पार्टी कार्यक्रमों से दूरी और सस्पेंस
शनिवार को देहरादून में प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा के कई सार्वजनिक कार्यक्रम होने हैं। रावत इन कार्यक्रमों में शामिल होंगे या नहीं, इस पर अभी भी संशय बना हुआ है। जहां एक तरफ वह सार्वजनिक कार्यक्रमों में सक्रिय दिख रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पार्टी के संगठनात्मक कार्यक्रमों से उनकी दूरी चर्चा का विषय बनी हुई है।

