उत्तराखंड में पीएनजी गैस नेटवर्क के विस्तार और ईको-फ्रेंडली विकल्पों पर जोर

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देहरादून में हुई एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने राज्य में पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) कनेक्शनों की संख्या बढ़ाने के सख्त निर्देश दिए हैं। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे व्यावसायिक संस्थानों को पीएनजी अपनाने के लिए प्रोत्साहित करें। इसके साथ ही, एलपीजी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए राज्य समन्वयकों के साथ निरंतर संपर्क बनाए रखने और घरेलू व व्यावसायिक सिलेंडरों की मांग के अनुरूप समय पर आपूर्ति करने पर जोर दिया गया है। बैठक में वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों और पर्यावरण संरक्षण पर भी चर्चा की गई।

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पीएनजी कनेक्शन और एलपीजी आपूर्ति में तेजी

मुख्य सचिव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिलाधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रदेश में गैस आपूर्ति की स्थिति को और बेहतर बनाया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि न केवल कनेक्शनों की संख्या बढ़ानी है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना है कि एलपीजी सिलेंडरों की होम डिलीवरी और व्यावसायिक आपूर्ति में कोई देरी न हो।

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पीरुल ब्रिकेट: रसोई गैस का नया और सुरक्षित विकल्प

सरकार अब जंगलों से मिलने वाली ‘पीरुल’ (चीड़ की सूखी पत्तियां) से बने ब्रिकेट को रसोई गैस के विकल्प के रूप में बढ़ावा दे रही है। इससे दो बड़े फायदे होंगे: पहला, एलपीजी पर निर्भरता कम होगी और दूसरा, जंगलों से पीरुल हटने से वनाग्नि (जंगल की आग) की घटनाओं में कमी आएगी, जिससे पर्यावरण सुरक्षित रहेगा।

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