देहरादून/हरिद्वार — उत्तराखंड में आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति अब केवल नेताओं तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि इसका असर अब सरकारी महकमों में काम करने वाले अधिकारियों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। ताजा मामला हरिद्वार जनपद का है, जहां ड्रग इंस्पेक्टर अनीता भारती पर लगाए गए गंभीर आरोप अब एक अजीब मोड़ पर पहुंच गए हैं—जहां आरोप लगाने वाला खुद अपनी सफाई में ज्योतिष का सहारा लेता नजर आया।
पूरा प्रकरण तब शुरू हुआ जब एक व्यक्ति ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से हरिद्वार में तैनात वरिष्ठ औषधि निरीक्षक अनीता भारती पर गंभीर आरोप लगाए। मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और विभाग की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े होने लगे। आरोपों की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने तत्काल संज्ञान लिया और अनीता भारती को ड्रग मुख्यालय अटैच करते हुए संबंधित व्यक्ति से लिखित रूप में जानकारी मांगी।
विभाग द्वारा पूछे गए सवाल सीधे और तथ्यात्मक थे। पहले पूछा गया कि जनपद हरिद्वार में अनीता भारती के स्तर पर उसका कौन सा लाइसेंस या कार्य लंबित था। दूसरे सवाल में ऑनलाइन आवेदन के बाद सामने आई समस्याओं का विवरण मांगा गया। तीसरे बिंदु में सोशल मीडिया पर प्रसारित सामग्री के संबंध में स्पष्ट करने को कहा गया कि क्या इस मुद्दे पर उसकी और अधिकारी के बीच कोई बातचीत या संवाद हुआ था।
लेकिन इन सवालों के जवाब में जो प्रतिक्रिया सामने आई, उसने पूरे मामले को और भी चौंकाने वाला बना दिया। आरोप लगाने वाले व्यक्ति ने अपने लिखित जवाब में कहा कि “28 मार्च 2026, शनिवार को मेरी मिथुन राशि में केतु के प्रवेश के कारण मेरी बुद्धि हरण हो गई थी। मैं आवेश में आ गया और प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से अपनी कुंठा व्यक्त कर दी।” उसने आगे यह भी लिखा कि उसका उद्देश्य विभाग की छवि धूमिल करना नहीं था, बल्कि एक विपरीत परिस्थिति के कारण उससे यह सब हो गया।
यह जवाब सामने आने के बाद विभागीय और प्रशासनिक हलकों में हैरानी जताई जा रही है। एक ओर जहां व्यक्ति ने ज्योतिषीय कारणों का हवाला देकर खुद को लगभग निर्दोष बताने की कोशिश की, वहीं दूसरी ओर इस पूरे घटनाक्रम का खामियाजा संबंधित महिला अधिकारी को भुगतना पड़ा। सूत्रों के मुताबिक, अनीता भारती को हरिद्वार से देहरादून मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया था।
इस घटनाक्रम ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या केवल आरोप लगाना ही किसी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई के लिए पर्याप्त है? क्या बिना ठोस साक्ष्य के किसी की छवि और करियर को प्रभावित करना इतना आसान हो गया है? और सबसे बड़ा सवाल—क्या सिस्टम इतना “कान का कच्चा” हो गया है कि वह बिना पूरी जांच के ही कार्रवाई कर बैठता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया के दौर में आरोप लगाना बेहद आसान हो गया है, लेकिन उनके प्रभाव बेहद गंभीर हो सकते हैं। एक वायरल वीडियो या प्रेस बयान किसी भी अधिकारी की वर्षों की मेहनत पर पानी फेर सकता है। ऐसे में विभागों को भी संतुलन बनाते हुए तथ्यों की गहराई से जांच करनी चाहिए, ताकि किसी निर्दोष को नुकसान न उठाना पड़े।
फिलहाल, हरिद्वार का यह मामला एक नजीर बनता जा रहा है—जहां एक ओर आरोप लगाने वाला “केतु के प्रभाव” का हवाला देकर खुद को अलग कर लेता है, वहीं दूसरी ओर एक अधिकारी को बिना स्पष्ट दोष के साइडलाइन कर दिया जाता है।
“केतु का असर या सिस्टम की कमजोरी? आरोप हवा में, कार्रवाई जमीन पर!” ड्रग इंस्पेक्ट अनीता भारती पर आरोप लगाने वाले ने लिखा गजब का पत्र….
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