प्रचार भी, पद भी… और कार्रवाई में नरमी भी? ये सब यहां ही संभव है…
Dehradun के सबसे बड़े सरकारी चिकित्सा संस्थान दून मेडिकल हॉस्पिटल में तैनात डिप्टी एमएस डॉ. विनम्र मित्तल इन दिनों चर्चाओं में हैं। मामला उनके सोशल मीडिया अकाउंट पर निजी क्लीनिक से जुड़ी तस्वीर साझा करने और उसके कथित प्रचार से जुड़ा है।
सूत्रों के अनुसार डॉ. मित्तल द्वारा अपने निजी क्लीनिक की फोटो सोशल मीडिया पर पोस्ट किए जाने के बाद चिकित्सा जगत में सवाल उठने लगे। सरकारी सेवा में कार्यरत अधिकारी द्वारा निजी प्रैक्टिस या उसके प्रचार को लेकर सर्विस रूल्स स्पष्ट दिशा-निर्देश देते हैं। ऐसे में इस तरह की गतिविधि को लेकर विभागीय हलकों में नाराजगी देखी गई।
मामले के तूल पकड़ने के बाद मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य डॉ. गीता जैन ने डॉ. विनम्र मित्तल को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण तलब किया है। हालांकि इस कार्रवाई को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। चर्चाओं का केंद्र यह है कि जब सोशल मीडिया पोस्ट स्वयं प्रमाण के रूप में मौजूद है, तब केवल स्पष्टीकरण मांगना क्या पर्याप्त कदम माना जाए? कई लोगों का मानना है कि यदि नियमों का उल्लंघन स्पष्ट दिखाई दे रहा है तो सीधे विभागीय जांच या अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए।
स्वास्थ्य विभाग में यह भी चर्चा है कि सरकारी पद पर रहते हुए निजी क्लीनिक का प्रचार करना न केवल आचार संहिता के विरुद्ध हो सकता है, बल्कि इससे संस्थान की छवि भी प्रभावित होती है। खासकर तब, जब संबंधित अधिकारी एक बड़े सरकारी अस्पताल में प्रशासनिक जिम्मेदारी निभा रहा हो। फिलहाल डॉ. मित्तल से लिखित जवाब मांगा गया है। उनके स्पष्टीकरण के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या विभागीय स्तर पर नियमों के उल्लंघन के मामलों में सख्त और पारदर्शी रुख अपनाया जाएगा या फिर नोटिस जारी कर औपचारिकता निभाने तक ही कार्रवाई सीमित रह जाएगी।।


