निदेशक खनन की शानदार रणनीति, खनन में टेक्नोलॉजी का कमाल, उत्तराखंड का मॉडल राष्ट्रीय मंच पर सम्मानित….

ख़बर शेयर करें

देहरादून। उत्तराखंड के भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। विभाग की दो प्रमुख डिजिटल पहल—एमडीटीएसएस (Mining Digital Transformation and Surveillance System) और ई-रवन्ना/सिक्योरिटी फीचर युक्त रवन्ना पेपर—को प्रतिष्ठित SKOCH Award “India’s Honest Independent Honour” के लिए चयनित किया गया है। यह सम्मान सुशासन, पारदर्शिता और नवाचार आधारित प्रशासनिक सुधारों के लिए दिया जाता है।राज्य सरकार के अनुसार एमडीटीएसएस एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसे खनिज परिवहन की निगरानी, अवैध खनन पर रोक और राजस्व वृद्धि के उद्देश्य से विकसित किया गया है। इस प्रणाली के माध्यम से स्रोत से गंतव्य तक खनिज परिवहन की एंड-टू-एंड डिजिटल ट्रैकिंग संभव हुई है। ई-रवन्ना और ई-ट्रांजिट परमिट का एकीकरण कर अवैध परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया गया है।
प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि प्रणाली में RFID और ANPR आधारित वाहन ट्रैकिंग की सुविधा भी जोड़ी गई है। चेकगेट पर स्वचालित नंबर प्लेट पहचान, RFID टैग आधारित आवागमन नियंत्रण तथा डुप्लिकेट या अवैध ट्रिप की पहचान से निगरानी तंत्र मजबूत हुआ है। इसके अलावा वेब्रिज (Weighbridge) एकीकरण के माध्यम से वाहनों के वजन की स्वचालित रिकॉर्डिंग, ओवरलोडिंग की पहचान और अलर्ट सिस्टम लागू किया गया है। एमडीटीएसएस के अंतर्गत राज्य और जनपद स्तर पर कंट्रोल एंड कमांड सेंटर तथा डैशबोर्ड विकसित किए गए हैं, जिनसे रियल-टाइम मॉनिटरिंग और KPI आधारित प्रदर्शन विश्लेषण संभव हो सका है। साथ ही IFMS, परिवहन विभाग (VAHAN) और माइंस पोर्टल जैसी बाहरी प्रणालियों से एकीकरण कर डेटा समन्वय को सुदृढ़ बनाया गया है।
दूसरी महत्वपूर्ण पहल सिक्योरिटी फीचर युक्त रवन्ना पेपर है। अवैध खनन और फर्जी रवन्ना प्रपत्रों की समस्या को देखते हुए राज्य में विशेष सुरक्षा विशेषताओं वाले रवन्ना फॉर्म लागू किए गए हैं। इनमें यूनिक क्यूआर कोड, वॉटरमार्क, माइक्रो-टेक्स्ट और इंडेलिबल इंक जैसे फीचर शामिल हैं, जिससे डुप्लिकेसी और दुरुपयोग की संभावना लगभग समाप्त हो गई है। विभाग का दावा है कि इन सुधारों से राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और पारदर्शिता सुनिश्चित हुई है।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार 28 मार्च 2026 को नई दिल्ली में आयोजित समारोह में यह सम्मान प्रदान किया जाएगा। राज्य सरकार ने इसे उत्तराखंड के लिए गौरव का विषय बताते हुए कहा है कि यह उपलब्धि प्रशासनिक सुधारों और तकनीकी नवाचारों के सफल क्रियान्वयन का प्रमाण है।
खनन क्षेत्र में डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की यह पहल न केवल अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने में सहायक सिद्ध हुई है, बल्कि राजस्व संग्रहण और निगरानी व्यवस्था को भी नई मजबूती प्रदान की है। SKOCH Award के लिए चयन से स्पष्ट है कि उत्तराखंड का यह मॉडल अब राष्ट्रीय स्तर पर सुशासन के एक उदाहरण के रूप में देखा जा रहा