उत्तराखंड प्रगति के रास्ते: धामी तोड़ेंगे एन.डी. तिवारी का रिकॉर्ड: 5 साल से ज्यादा सीएम बनेंगे पुष्कर सिंह धामी

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जिस उत्तराखंड की सियासी पिच पर एन.डी.तिवारी के अलावा अभी तक कोई भी पूरे पांच साल बैटिंग नहीं कर पाया है। लेकिन जिस तरह से सीएम पुष्कर धामी जमे हुए हैं उससे साफ पता चल रहा है कि पुष्कर धामी में कुछ तो खास है।
आलाकमान की पहली पसंद बने धामी के काम का अंदाज साफ बता रहा है धामी जल्द ही सीएम बने रहने का एन.डी.तिवारी का रिकार्ड तोड़ देंगे। तिवारी सिर्फ पांच साल उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे लेकिन धामी उनसे से भी एक साल ज्यादा सीएम रहेंगे।जिस तरह से पीएम मोदी से लेकर भाजपा संगठन नेतृत्व का धामी पर भरोंसा बढ़ा है उससे साफ लग रहा है कि धामी कुछ खास है।

इन बीते चार सालों पर नजर डालें तो पुष्कर धामी पर आलाकमान का विश्वास साफ दिखाई देता है। पीएम मोदी से मुलाकातें हों या आलानेताओं का उत्तराखंड दौरा हर क्षण बताता है कि सीएम धामी पर आलाकमान को पूरा विश्वास है। कोई उनकी तरफ तिरछी नजर से देख भी नहीं सकता। जरा याद कीजिए पार्टी अध्यक्ष रहते हुए जे.पी नड्डा ने धामी की शान में क्या कहा था। वहीं जब देश के गृह मंत्री अमित शाह हरिद्वार दौरे पर आए थे तो सीएम धामी के अब तक के कार्यकाल की कितनी तारीफ की थी। अभी हाल में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह नैनीताल दौरे पर आए तो सीएम धामी के कामकाज को बेहतरीन करार दे दिया।
खुद देश के पीएम नरेंद्र मोदी सीएम धामी की पीठ लाजवाब कामकाज के लिए थपथपा चुके हैं उससे साफ साबित हो रहा है कि आसान नहीं होता धामी बनना। कुछ-न कुछ बात तो है जो धामी को दूसरे सियासी लोगों से अलग करती है। जरा सोचिए क्या मुमकिन है कि आप सीएम रहते हुए चुनाव हार जांए और आलाकमान नई सरकार का मुखिया आपको ही बना दे।लेकिन पुष्कर धामी के साथ ऐसा हुआ है। खटीमा सीट सीएम रहते हुए हार गए लेकिन भाजपा को पूरे उत्तराखंड में जिता गए। भाजपा अलाकमान ने उनके एक साल के कामकाज उनकी दूरदर्शी सोच को पहचाना और सूबे की नई सरकार बनाने की जिम्मेदारी धामी के कांधे पर रख दी। आलाकमान के इस भरोसे ने धामी को नई ऊर्जा दी और पुष्कर धामी अपने इस कार्यकाल में धाकड़ धामी बनकर निखरे। उनके कामकाज का ही असर है कि आज उत्तराखंड प्रगति के रास्ते पर सरपट दौड़ रहा है और चारों ओर धामी की जय जयकार हो रही है।

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धामी राज्य में प्रतिव्यक्ति आय बढ़ी है। राज्य प्रगति के पथ पर आगे बढ़ रहा है। महिला सशक्तिकरण की दिशा में राज्य के भीतर 2.54 लाख लखपति दीदी तैयार हैं। राज्य में 3.56 लाख करोड़ के निवेश के लिए एएमयू हुए हैं, जिनमें 1.5 लाख करोड़ के एएमयू पर काम भी शुरू होचा है। धाकड़ धामी के साहस की बदौलत ही राज्य बनी सैकड़ो मजारों को ध्वस्त किया गया और तकरीबन बारह हजार एकड़ से ज्यादा जमीन को कब्जा मुक्त कराया गया है। राज्य आंदोलनकारियों की पेंशन में बढ़ोत्तरी की गई है। शहीद सैनिकों के परिवारें का ख्याल रखते हुए धामी सरकार ने उनके आश्रित परिजनो की अनुग्रह राशि में ईजाफा किया है। तुष्टिकरण की नीति को दरकिनार करते हुए मदरसा बोर्ड को भंग कर दिया गया है. अग्निवीरों को राज्य सरकार की नौकरियों में दस फीसदी का क्षैतिज आरक्षण का प्रावधान किया है। राज्य की खनन नीति में बेहिसाब सुधार हुआ है आज खनन से जो राजस्व प्राप्त हो रहा है वो 400 करोड़ से बढ़कर 1200 करोड़ पहुच चुका है।

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राज्य पर्यटको की पहली पसंद बन रहा है। साल 2025 में 6 करोड़ से ज्यादा सैलानियों ने राज्य की वादियों का दीदार किया है। उत्तराखंड राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना है। धामी कार्यकाल में उत्तराखंड जैसे राज्य में राष्ट्रीय खेलों का सफल आयोजन हुआ है। उत्तराखंड धाकड़ धामी के दौर में ईज ऑफ डूइग बिजनेस में अचीवर तो स्टार्टअप रैंकिग में लीडर बना है। इतना ही नही लगातार कुछ न कुछ नया हो रहा है। हालांकि कुछ दिक्कतों के भी कांटे हैं खासकर स्वास्थ्य सेवाओं में जिन्हे हटाने के लिए धामी सरकार लगातार जुटी हुई है। धरती के भगवानों को हर तरह से रिझाने की कोशिश की जा रही हैं ताकि राज्य मे सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं बेहतरीन बन सकें। धामी सरकार ने अपने चिकित्सकों के लिए हाथ आगे बढ़ाए हुए हैं ताकि उन्हें गले लगाया जा सके, बस अब गेंद डाक्टरों के पाले में हैं उन्हें अपने भीतर पगार के साथ सेवा भाव जिंदा रखना है या कमाई वाला बिजनेस। बहरहाल पुष्कर धामी के काम साबित कर ही रहे हैं कि उन्हें धाकड़ धामी क्यों कहा जा रहा है