#धामी 4 साल बेमिसाल… “सियासी शोर के बीच धामी का जोर—फिर दिखा नेतृत्व का दम!” मंत्री मण्डल विस्तार के बाद झूठे कयासों पर लगा ब्रेक…

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देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपनी मजबूत पकड़ और नेतृत्व क्षमता का परिचय दिया है। लंबे समय से चल रही अटकलों और राजनीतिक चर्चाओं के बीच हुए मंत्रिमंडल विस्तार के बाद यह साफ संकेत मिल गया है कि पार्टी हाईकमान का भरोसा आज भी धामी पर पूरी तरह कायम है।
बीते कुछ समय से मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर सियासी गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही थीं। कई बार कथित रूप से तारीखें तक तय कर दी गईं कि नेतृत्व परिवर्तन हो सकता है, लेकिन हर बार ये कयास धरे के धरे रह गए। अब मंत्रिमंडल विस्तार के बाद जिस तरह से स्थिति स्पष्ट हुई है, उसने इन सभी अटकलों पर विराम लगा दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम धामी की मजबूत पकड़ और संगठन में उनकी स्वीकार्यता को दर्शाता है।
माना जा रहा है कि केंद्र से मिली हरी झंडी और शीर्ष नेतृत्व द्वारा जताया गया विश्वास इस बात का स्पष्ट संकेत है कि आगामी विधानसभा चुनाव में भी नेतृत्व की कमान धामी के हाथों में ही रहने वाली है। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि वह अब तक के सबसे प्रभावशाली मुख्यमंत्रियों में अपनी जगह मजबूत करते नजर आ रहे हैं।
धामी ने अपने कार्यकाल के दौरान “जीरो टॉलरेंस” की नीति को लगातार आगे बढ़ाया है। भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख और प्रशासनिक कसावट को लेकर उनकी कार्यशैली कई बार चर्चा में रही है। यही कारण है कि पार्टी नेतृत्व भी उन्हें एक मजबूत और निर्णायक नेता के रूप में देख रहा है। सरकार की योजनाओं को धरातल पर उतारने और आम जनता के हितों को प्राथमिकता देने के उनके प्रयासों को भी सकारात्मक रूप से लिया जा रहा है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि धामी ने न केवल संगठन के भीतर बल्कि जनता के बीच भी अपनी एक अलग पहचान बनाई है। यही वजह है कि बार-बार उठने वाले सवालों और अफवाहों के बावजूद उनकी स्थिति कमजोर होने के बजाय और मजबूत होती गई। मंत्रिमंडल विस्तार के बाद जो संदेश गया है, वह साफ तौर पर यह दर्शाता है कि नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाएं केवल सियासी अटकलें भर थीं।
वहीं, विपक्ष द्वारा समय-समय पर उठाए गए सवालों और सरकार को घेरने की कोशिशों के बीच भी धामी ने अपने कामकाज के जरिए जवाब देने की रणनीति अपनाई। उन्होंने कई मौकों पर यह स्पष्ट किया कि सरकार का फोकस केवल विकास और जनहित पर है, न कि राजनीतिक अफवाहों पर।
यह भी महत्वपूर्ण है कि राज्य में विकास कार्यों की गति, निवेश को आकर्षित करने के प्रयास और प्रशासनिक सुधारों को लेकर केंद्र सरकार की नजर लगातार बनी हुई है। ऐसे में धामी पर जताया गया भरोसा इस बात का संकेत है कि उनके नेतृत्व में राज्य सरकार की दिशा और गति को सही माना जा रहा है।
कुल मिलाकर, हालिया राजनीतिक घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि किसी के कहने मात्र से नेतृत्व में बदलाव संभव नहीं होता। इसके पीछे कार्यशैली, संगठनात्मक पकड़ और जनता के बीच स्वीकार्यता जैसे कई कारक अहम भूमिका निभाते हैं।
अब सभी की नजरें आगामी विधानसभा चुनावों पर टिकी हैं, जहां यह देखना दिलचस्प होगा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपने नेतृत्व में पार्टी को किस तरह आगे ले जाते हैं। फिलहाल इतना जरूर कहा जा सकता है कि उन्होंने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि वह केवल नाम के नहीं, बल्कि काम के दम पर राजनीति में अपनी मजबूत जगह बनाए हुए हैं।