पश्चिमी एशिया में तनाव और अमेरिका, इजरायल व ईरान के बीच जारी संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 15 फीसदी की भारी बढ़ोतरी हुई है, जिससे दाम 84 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गए हैं। हालांकि, भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि इसका भारतीय उपभोक्ताओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा क्योंकि देश में तेल और गैस का पर्याप्त भंडार मौजूद है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, भारत अब केवल कतर पर निर्भर नहीं है; ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे देशों ने भी गैस आपूर्ति का प्रस्ताव दिया है। अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए भारत ने रूस से कच्चे तेल का आयात बढ़ा दिया है और अपनी कुल एलपीजी खपत का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा अमेरिका से लेना शुरू कर दिया है, ताकि अंतरराष्ट्रीय उथल-पुथल के बीच घरेलू कीमतें स्थिर बनी रहें।
भारत के पास 50 दिनों का तेल भंडार सुरक्षित
भारत सरकार के पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, देश की ऊर्जा सुरक्षा पूरी तरह मजबूत है और वर्तमान में भारत के पास 50 दिनों की आवश्यकता के बराबर तेल का स्टॉक उपलब्ध है। इस भंडार में 25 दिनों से अधिक का कच्चा तेल और अगले 25 दिनों की जरूरत के हिसाब से पेट्रोल-डीजल शामिल है। मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने आश्वस्त किया है कि स्थिति पूरी तरह सामान्य है और सरकार लगातार अन्य देशों व आपूर्तिकर्ताओं के संपर्क में है ताकि भविष्य में भी कोई बाधा न आए। इसके साथ ही, देश में एलपीजी (LPG), सीएनजी (CNG) और एलएनजी (LNG) की भी फिलहाल कोई कमी नहीं है।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत: वैकल्पिक मार्गों से आपूर्ति जारी
ईरान की धमकियों और वैश्विक तनाव के बावजूद भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि देश के पास वर्तमान में 50 दिनों की जरूरत के बराबर तेल भंडार उपलब्ध है। इसमें 25 दिनों से अधिक का कच्चा तेल और 25 दिनों का पेट्रोल-डीजल स्टॉक शामिल है। रणनीतिक बदलाव के तहत भारत ने होर्मुज जलमार्ग पर अपनी निर्भरता कम कर दी है; अब कुल आयात का केवल 40% हिस्सा होर्मुज से गुजरता है, जबकि शेष 60% सुरक्षित वैकल्पिक रास्तों से आ रहा है। हालांकि युद्ध के कारण कीमतें 84 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गई हैं और संघर्ष बढ़ने पर यह 90 डॉलर तक जा सकती हैं, लेकिन सरकार सस्ते बीमा के लिए अमेरिका के डीएफसी और वैकल्पिक सप्लाई के लिए आईईए (IEA) व ओपेक (OPEC) के साथ निरंतर संपर्क में है। मंत्रालय ने आश्वस्त किया है कि देश में एलपीजी और सीएनजी की फिलहाल कोई कमी नहीं है।

