देहरादून में कांग्रेस का प्रदर्शन: दावों और हकीकत के बीच फंसा सियासी संदेश, बीजेपी ने बताया फ्लॉप शो….

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देहरादून में सरकार के खिलाफ कांग्रेस द्वारा आयोजित प्रदर्शन को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। प्रदर्शन से पहले कांग्रेस नेताओं ने बड़े जनसमूह के जुटने का दावा किया था और इसे जनता के आक्रोश की आवाज बताया था। लेकिन कार्यक्रम के बाद भीड़ को लेकर उठे सवालों ने इस दावे की धार को कमजोर कर दिया है। हालांकि, बीजेपी ने इस प्रदर्शन को “फ्लॉप शो” करार दिया है। भाजपा नेताओं का आरोप है कि कांग्रेस जितनी भीड़ का दावा कर रही थी, वह धरातल पर दिखाई नहीं दी। उनका कहना है कि यदि वास्तव में जनता में व्यापक असंतोष होता, तो प्रदर्शन में स्वतःस्फूर्त और भारी भागीदारी देखने को मिलती। भाजपा ने यह भी कहा कि कांग्रेस केवल राजनीतिक माहौल बनाने के लिए प्रतीकात्मक विरोध कर रही है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि किसी भी आंदोलन की सफलता का पैमाना केवल नारेबाजी नहीं, बल्कि वास्तविक जनसमर्थन होता है। देहरादून में हुए इस प्रदर्शन ने यही बहस छेड़ दी है कि क्या यह वास्तव में व्यापक जनआक्रोश की अभिव्यक्ति था या फिर अपेक्षाओं से कम भीड़ के कारण संदेश कमजोर पड़ गया। कांग्रेस नेता जहां इसे अपनी उपलब्धि बताकर सकारात्मक संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं भाजपा इसे विपक्ष की संगठनात्मक कमजोरी के रूप में पेश कर रही है। दोनों दल अपने-अपने राजनीतिक नजरिए से इस कार्यक्रम की व्याख्या कर रहे हैं।
फिलहाल, देहरादून का यह प्रदर्शन सत्ता और विपक्ष के बीच बयानबाजी का नया केंद्र बन गया है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि यह कार्यक्रम राजनीतिक रणनीति का हिस्सा भर था या किसी बड़े आंदोलन की भूमिका। अभी के लिए, भीड़ के आकलन ने ही पूरे प्रदर्शन की दिशा और प्रभाव को चर्चा का विषय बना दिया है।