सीएम के तेवर कड़क, मंत्री के आदेश सख्त… फिर कहां गायब हो गई स्वास्थ योजनाएं….?

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देहरादून। उत्तराखंड में इन दिनों स्वास्थ्य विभाग को लेकर एक अजीब सी खामोशी देखने को मिल रही है। कभी योजनाओं और घोषणाओं के कारण लगातार सुर्खियों में रहने वाला स्वास्थ्य महकमा अब मानो खबरों से ही गायब हो गया है। न तो नई योजनाओं की चर्चा सुनाई दे रही है और न ही पहले घोषित कार्यक्रमों की प्रगति को लेकर कोई ठोस जानकारी सामने आ रही है। ऐसे में सवाल उठने लगे हैं कि आखिर सूबे के स्वास्थ्य विभाग में चल क्या रहा है ? जानकारों का कहना है कि राज्य में स्वास्थ्य के क्षेत्र में बड़े-बड़े काम शायद बंद कमरों में तय किए जा रहे होंगे, लेकिन धरातल पर उनका कोई प्रचार-प्रसार नजर नहीं आ रहा। हालात ऐसे हैं कि कई योजनाएं लोगों तक पहुंचने से पहले ही फाइलों और कागजों में ही दफन होती दिखाई दे रही हैं। इसके बावजूद विभाग की ओर से सब कुछ ठीक होने का संदेश दिया जा रहा है और “ऑल इज वेल” मानो विभाग का तकिया कलाम बन गया है।
प्रदेश के बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए हर साल करोड़ों रुपये का प्रावधान किया जाता है, लेकिन इन योजनाओं का वास्तविक लाभ आखिर किसे मिल रहा है, यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है। कई मामलों में तो यह भी स्पष्ट नहीं हो पाता कि योजनाएं वास्तव में धरातल पर लागू हो रही हैं या केवल कागजी औपचारिकताओं तक ही सीमित रह जाती हैं। स्वास्थ्य विभाग में हाल के महीनों में प्रशासनिक स्तर पर भी कई बदलाव हुए हैं। उच्च स्तर पर बदलाव से लेकर विभागीय नेतृत्व में फेरबदल तक देखने को मिला, लेकिन इन बदलावों का असर नीतियों और योजनाओं में साफ नजर आ रहा है । कुछ समय पहले मुख्यमंत्री और विभागीय मंत्री की ओर से स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने को लेकर सख्त निर्देश दिए गए थे, लेकिन अब उन निर्देशों की चर्चा भी धीरे-धीरे गायब होती नजर आ रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में पारदर्शिता और संवाद बेहद जरूरी होता है। यदि योजनाओं और कार्यक्रमों की जानकारी जनता तक नहीं पहुंचेगी तो उनका वास्तविक प्रभाव भी सीमित रह जाएगा। राज्य के दूरस्थ और पर्वतीय क्षेत्रों में आज भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की जरूरत महसूस की जाती है, ऐसे में योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन और उनका प्रचार-प्रसार दोनों ही आवश्यक हैं।
इधर स्वास्थ्य विभाग को मिलने वाली अंतरराष्ट्रीय सहायता को लेकर भी चर्चाओं का बाजार गर्म है। खासकर वर्ल्ड बैंक से मिलने वाली संभावित धनराशि को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। सूत्रों के अनुसार स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए बाहरी वित्तीय सहायता पर भी काम चल रहा है, लेकिन इस संबंध में तरह तरह की चर्चाएं हो रहीं है। सूत्रों की माने इस योजना पर काम करने वाले एक अधिकारी vrs तक लेने के लिए आवेदन किया हैं जो चर्चाओंका केंद्र बना हुआ है
ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या स्वास्थ्य विभाग किसी बड़े मिशन की तैयारी में जुटा हुआ है और इसलिए फिलहाल चुप्पी साधे हुए है, या फिर योजनाओं की गति ही धीमी पड़ गई है। फिलहाल स्थिति यह है कि स्वास्थ्य विभाग अखबारों की सुर्खियों से लेकर सोशल मीडिया की चर्चाओं तक से लगभग गायब नजर आ रहा है।
राज्य के नागरिकों और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े लोगों की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले समय में विभाग किस दिशा में कदम बढ़ाता है। यदि योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है और उनकी जानकारी आम जनता तक पहुंचाई जाती है, तो इससे न केवल स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की जानकारी लोगों तक पहुंचेगी बल्कि सरकार की नीतियों पर भरोसा भी मजबूत होगा।।