सीएम धामी की जीरो टॉलरेंस नीति का स्वास्थ्य विभाग में दिखा असर, जांच के दौरान हटाए गए जेडी स्टोर आनंद शुक्ला… ठेकदारों के साथ बैठकी के फोटो सामने आने के बाद अधिकारी सख्ते में….

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देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की जीरो टॉलरेंस की नीति अब स्वास्थ्य विभाग में असर दिखाने लगी है। विभाग में खरीद प्रक्रिया को लेकर आई शिकायत के बाद सीएम धामी ने तुरंत जांच के निर्देश दिए थे। लेकिन जांच प्रभावित न हो, इसके लिए जिस अधिकारी को तत्काल हटाया जाना चाहिए था, उसे पद पर बने रहने दिया गया। इससे जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे थे। मामले को समाचार 4U ने प्रमुखता से उठाया, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों को कार्रवाई करनी पड़ी। विभागीय स्तर पर तत्काल आदेश जारी करते हुए स्वास्थ्य महानिदेशक ने संयुक्त निदेशक भंडारण डॉ. आनंद शुक्ला को पद से हटा दिया है। उनकी जगह अब पंकज शर्मा को यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है।

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सूत्रों के मुताबिक, डॉ. शुक्ला की दो ठेकेदारों के साथ घनिष्ठता भी चर्चा में है । हाल ही में ठेकेदारों के साथ उनकी एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई, जिससे विभाग और सरकार दोनों ही सकते में आ गए। वायरल फोटो ने संदेह को और मजबूत किया कि विभागीय खरीद में पारदर्शिता नहीं बरती जा रही। इसके बाद स्वास्थ्य महानिदेशक ने आनन-फानन में यह निर्णय लिया।

हालांकि विभागीय सूत्र यह भी मानते हैं कि यह कार्रवाई बहुत पहले हो जानी चाहिए थी। लंबे समय से इस संबंध में चर्चा चल रही थी कि डॉ. शुक्ला पर कार्रवाई टल रही है। चर्चा है कि उन्हें राजनीतिक संरक्षण प्राप्त था, जिसके चलते विभाग तुरंत कदम उठाने से बचता रहा। लेकिन सीएम धामी की जीरो टॉलरेंस नीति के बाद अंततः स्वास्थ्य विभाग को सख्त कदम उठाना पड़ा।

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इस कार्रवाई के बाद विभागीय कर्मचारियों और अधिकारियों में भी हलचल मच गई है। कई अधिकारियों का कहना है कि यदि उच्च स्तर से लगातार मॉनिटरिंग की जाए तो भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर अंकुश लगाया जा सकता है। वहीं, स्वास्थ्य विभाग की छवि को सुधारने और जनता का विश्वास बहाल करने के लिए भी यह कदम अहम माना जा रहा है।

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जानकारों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग जैसे संवेदनशील विभाग में किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार या पक्षपात जनता की जान से खिलवाड़ करने के समान है। यही वजह है कि मुख्यमंत्री धामी बार-बार जीरो टॉलरेंस की बात दोहराते आए हैं। अब विभागीय स्तर पर की गई यह कार्रवाई इस नीति का प्रत्यक्ष उदाहरण बनकर सामने आई है।

यह देखना दिलचस्प होगा कि आगे जांच में क्या खुलासे होते हैं और क्या अन्य अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, विभागीय हलकों में यह फैसला एक बड़ा संदेश माना जा रहा है कि भ्रष्टाचार या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।