उत्तराखंड सरकार ने प्रदेश में घरेलू और व्यावसायिक एलपीजी गैस की आपूर्ति व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी और सुचारू बनाने के लिए अब प्रतिदिन समीक्षा करने का निर्णय लिया है। प्रमुख सचिव खाद्य एल फैनई ने वर्चुअल बैठक के माध्यम से अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि गैस वितरण में किसी भी प्रकार का ‘बैकलॉग’ (पुरानी पेंडिंग डिमांड) न रहे। इसके लिए तेल कंपनियों के साथ निरंतर समन्वय बनाकर दैनिक आधार पर आपूर्ति की निगरानी की जाएगी। प्रशासन का लक्ष्य है कि प्रदेश में बढ़ती मांग को देखते हुए आपूर्ति की मात्रा में वृद्धि की जाए ताकि उपभोक्ताओं को कोई असुविधा न हो।
आपूर्ति का लक्ष्य और चारधाम यात्रा की तैयारी
बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि वर्तमान में आपूर्ति को बढ़ाते हुए प्रतिदिन लगभग 60 हजार घरेलू सिलेंडर और 6 हजार व्यावसायिक सिलेंडर की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। आगामी चारधाम यात्रा को देखते हुए विभाग विशेष रूप से मुस्तैद है। यात्रा मार्ग और पर्वतीय क्षेत्रों में नेटवर्क व वितरण संबंधी समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर हल करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि तीर्थयात्रियों और स्थानीय निवासियों को ईंधन की कमी का सामना न करना पड़े।
अनियमितताओं पर अधिकारियों की सख्ती
सचिव खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति आनंद स्वरूप ने बताया कि गैस और ईंधन वितरण में होने वाली गड़बड़ियों को रोकने के लिए विभाग द्वारा कड़ा प्रवर्तन अभियान चलाया जा रहा है। अब तक प्रशासन ने:
- 6280 जगहों पर निरीक्षण किया है।
- 423 बार छापेमारी की कार्रवाई की गई है।
- नियमों के उल्लंघन पर 19 FIR भी दर्ज की गई हैं। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि अनियमितता पाए जाने पर किसी भी स्तर पर नरमी न बरती जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाए।
प्रशासनिक सतर्कता
इस महत्वपूर्ण बैठक में अपर आयुक्त पीएस पांगती, स्वर्ण सिंह, पंकज और अश्वनी कुमार जैसे वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। प्रशासन का पूरा जोर इस बात पर है कि दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में भी वितरण प्रणाली को सुदृढ़ किया जाए ताकि अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक गैस की पहुंच आसान हो सके।

