उत्तराखंड में मुख्यमंत्री धामी की नई पहल: श्रमिकों के बच्चों को अब विदेशों में मिलेगा रोजगार

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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य में कौशल विकास के जरिए पलायन को रोकने के लिए एक बड़ी योजना की घोषणा की है। सरकार अब निर्माण श्रमिकों के बच्चों को न केवल स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित करेगी, बल्कि उन्हें विदेशों में भी रोजगार के अवसर उपलब्ध कराएगी। इसके लिए विदेश मंत्रालय में पंजीकृत एजेंसियों की मदद ली जाएगी। मुख्यमंत्री ने साफ़ किया कि पहाड़ी क्षेत्रों से युवाओं के पलायन को रोकने के लिए उन्हें प्लंबर, इलेक्ट्रिशियन और योग-वेलनेस जैसे क्षेत्रों में आधुनिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।

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श्रमिकों के लिए डिजिटल सुविधाएं और आर्थिक मदद

मुख्यमंत्री ने ‘श्रमिक सेवा’ मोबाइल ऐप लॉन्च किया है, जिससे अब श्रमिकों को सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे मिल सकेगा। पारदर्शिता बढ़ाने के लिए डीबीटी के माध्यम से 8005 श्रमिकों के खातों में ₹17.25 करोड़ की धनराशि सीधे ट्रांसफर की गई है। पिछले छह महीनों में कुल 19,833 श्रमिकों को लगभग ₹47.14 करोड़ की मदद दी जा चुकी है। अब जियो टैगिंग और लाइव फोटो के जरिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सहायता राशि सही व्यक्ति तक पहुंचे।

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स्वास्थ्य जांच और कार्यस्थल पर सुविधाएं

श्रमिकों के कल्याण के लिए सरकार ने उनके कार्यस्थल पर ही चिकित्सा जांच की सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री का मानना है कि इससे श्रमिकों के काम में बाधा नहीं आएगी और उनकी सेहत का भी ख्याल रखा जा सकेगा। साथ ही, श्रमिकों को प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना से जोड़ने और उनके नियमित स्वास्थ्य परीक्षण के लिए अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए गए हैं।

विकास कार्यों में लापरवाही पर सख्त रुख

मुख्यमंत्री धामी ने अधिकारियों को चेतावनी दी है कि जनहित से जुड़े विकास कार्यों में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अफसरों को समयबद्ध तरीके से काम पूरा करने और विधायकों के साथ निरंतर संवाद बनाए रखने को कहा है। इसके अलावा, राज्य में जैविक खेती, मिलेट उत्पादन और बागवानी को बढ़ावा देने के लिए नई तकनीक और सिंचाई सुविधाओं पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है ताकि किसानों की आय में वृद्धि हो सके।