उत्तराखंड सरकार और पुलिस प्रशासन ने आगामी चारधाम यात्रा को पूरी तरह सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए कमर कस ली है। इस साल यात्रा मार्ग की सुरक्षा के लिए पहली बार इतने बड़े स्तर पर तकनीक का सहारा लिया जा रहा है, जिसमें 1250 से अधिक सीसीटीवी (CCTV) कैमरे और 15 अत्याधुनिक ड्रोन तैनात किए गए हैं। आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप के अनुसार, यात्रा मार्ग को 16 जोन, 43 जोन और 149 सेक्टरों में बांटकर भारी पुलिस बल की तैनाती की जा रही है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए परिवहन चेकपोस्टों पर वाई-फाई और एनपीआर (ANPR) कैमरों जैसी आधुनिक सुविधाएं भी शुरू की गई हैं ताकि यात्रा का अनुभव सुरक्षित और यादगार रहे।
CCTV और ड्रोन से आसमान और जमीन पर नजर
सुरक्षा के लिहाज से पूरे यात्रा मार्ग पर 1250 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिनमें से 92 कैमरे सीधे धामों के परिसर में होंगे। इसके अलावा, आसमान से निगरानी के लिए 15 ड्रोन हर वक्त तैनात रहेंगे, जो हरिद्वार, टिहरी, उत्तरकाशी और चमोली के रूटों पर पल-पल की जानकारी पुलिस मुख्यालय को भेजेंगे।
45 हजार वाहनों के लिए विशाल पार्किंग व्यवस्था
भीड़ और जाम की समस्या से निपटने के लिए प्रशासन ने इस बार करीब 45 हजार छोटे-बड़े वाहनों के लिए पार्किंग की विशेष व्यवस्था की है। हरिद्वार में सबसे अधिक 17 पार्किंग स्थलों पर लगभग 44,000 वाहनों को पार्क करने की क्षमता विकसित की गई है, वहीं देहरादून, पौड़ी और अन्य जिलों में भी हजारों वाहनों के लिए जगह चिन्हित की गई है।
16 चेकपोस्ट पर वाई-फाई और एनपीआर (ANPR) सिस्टम
परिवहन विभाग ने यात्रा मार्ग पर स्थित 16 चेकपोस्टों को वाई-फाई सुविधा से लैस कर दिया है, जो 16 अप्रैल से पूरी तरह सक्रिय हो जाएंगे। इन चेकपोस्टों पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) कैमरे लगाए गए हैं, जो वाहनों की फिटनेस, ग्रीन कार्ड और जरूरी दस्तावेजों की तत्काल जांच करेंगे। इससे यात्रा के दौरान अनावश्यक देरी नहीं होगी।
खतरनाक जोन और ‘बॉटल नेक’ की पहचान
प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर पूरे मार्ग पर 52 ‘बॉटल नेक’ (संकरी जगहें) और 109 भूस्खलन संभावित क्षेत्रों की पहचान की है। टिहरी में सबसे अधिक 50 ऐसे क्षेत्र हैं। इसके अलावा, दुर्घटना की आशंका वाले 274 पॉइंट चिन्हित कर वहां चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं और डेंजर जोन पर एसडीआरएफ (SDRF) व जल पुलिस की टीमें तैनात की गई हैं।
पर्यटक पुलिस सहायता केंद्र और आपदा टीमें
यात्रियों की तत्काल मदद के लिए मार्ग पर 57 पर्यटक पुलिस सहायता केंद्र बनाए गए हैं। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए 80 स्थानों पर आपदा प्रबंधन टीमें, 37 स्थानों पर एसडीआरएफ और 30 स्थानों पर फायर सर्विस की टीमें तैनात रहेंगी ताकि श्रद्धालुओं को हर संभव मदद मिल सके।

