चारधाम यात्रा 2026: 9 दिन बाकी, उत्तरकाशी-रुद्रप्रयाग में गैस संकट से पर्यटन ठप

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उत्तराखंड में चारधाम यात्रा शुरू होने में अब केवल 9 दिन शेष हैं, लेकिन यात्रा मार्ग के प्रमुख पड़ावों जैसे उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग और चमोली में कमर्शियल गैस सिलेंडर की भारी किल्लत बनी हुई है। पिछले एक महीने से व्यापारी सिलेंडर का इंतजार कर रहे हैं और स्थिति यह है कि कई जिलों को उनकी जरूरत का 20% हिस्सा भी नहीं मिल पा रहा है। अगर अगले एक हफ्ते में सप्लाई नहीं सुधरी, तो होटल, होमस्टे और ढाबा संचालकों के लिए यात्रियों को सेवाएं देना नामुमकिन हो जाएगा, जिसका सीधा असर राज्य के पर्यटन कारोबार पर पड़ेगा।

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व्यापारियों और होटल कारोबारियों की बढ़ी चिंता

गैस की कमी के कारण यमुनोत्री और गंगोत्री मार्ग के होटल व्यवसायी बेहद परेशान हैं। स्थिति इतनी गंभीर है कि उत्तरकाशी में व्यापारियों को 25 दिनों से सिलेंडर नहीं मिला है। रुद्रप्रयाग और चमोली के होटल संचालकों का कहना है कि बिना गैस के वे यात्रियों के लिए भोजन की व्यवस्था कैसे करेंगे? गैस न मिलने के कारण कई हलवाई और रेस्टोरेंट संचालक अब मजबूरन 15-20 साल पुरानी कोयले और लकड़ी की भट्टियों को दोबारा शुरू कर रहे हैं।

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आंकड़ों में गैस संकट की भयावहता

यात्रा सीजन के दौरान राज्य को लगभग 10 लाख कमर्शियल सिलेंडरों की जरूरत होती है, लेकिन वर्तमान में आपूर्ति बहुत कम है। प्रदेश के तीन प्रमुख जिलों—उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग और चमोली—के हिस्से में प्रतिदिन सिर्फ 900 सिलेंडर ही आ रहे हैं। इनमें से रेस्टोरेंट और ढाबों को केवल 288 सिलेंडर मिल पा रहे हैं, जो जरूरत के मुकाबले ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। वर्तमान में राज्य को केवल 66% कमर्शियल कोटा ही मिल पा रहा है।

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विकल्पों की तलाश और बढ़ती लागत

गैस न मिलने के कारण छोटे रेहड़ी-पटरी संचालक और दुकानदार अब महंगे विकल्पों का सहारा ले रहे हैं। कुछ लोग ₹90 प्रति लीटर वाले महंगे डीजल स्टोव जला रहे हैं, तो कुछ इंडक्शन और बिजली के चूल्हों पर निर्भर हैं। इससे कारोबारियों की लागत बढ़ रही है और शादियों के सीजन में ऑर्डर पूरे न कर पाने के कारण उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। व्यापारियों ने प्रशासन से जल्द से जल्द सुचारू आपूर्ति की मांग की है।

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