देहरादून की पूर्व मेयर स्वर्गीय मनोरमा डोबरियाल शर्मा के परिवार को हाल ही में एक अजीबोगरीब स्थिति का सामना करना पड़ा, जब लोकसभा सचिवालय की ओर से उनके नाम एक आधिकारिक निमंत्रण पत्र पहुंचा। चौंकाने वाली बात यह है कि मनोरमा शर्मा का निधन 11 साल पहले, 18 फरवरी 2015 को हो चुका है। सचिवालय की ओर से उन्हें 20 मार्च 2026 को होने वाली एक परिचर्चा और महिला संसदीय सदस्यों पर आधारित पुस्तक में योगदान देने के लिए आमंत्रित किया गया। अब इसे मानवीय भूल कहें या तकनीकी लापरवाही लेकिन इस न्यौते ने परिजनों को हैरान कर दिया और सचिवालय की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
परिजनों का तीखा कटाक्ष
स्वर्गीय मनोरमा शर्मा के बेटे, विवेक शर्मा डोबरियाल ने इस घटना पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने इसे महज एक ‘मानवीय भूल’ मानने के बजाय घोर लापरवाही करार दिया। विवेक ने सोशल मीडिया के माध्यम से तंज कसते हुए लिखा कि वह अपनी मां से निवेदन करेंगे कि वे वहां (परलोक से) पहुंचकर सचिवालय के अधिकारियों की “बुद्धि शुद्धि” जरूर करवाएं।
क्या था निमंत्रण का उद्देश्य?
लोकसभा सचिवालय की संयुक्त सचिव ज्योत्सनामयी सिन्हा की ओर से भेजे गए इस पत्र में मनोरमा शर्मा को महिला संसदीय सदस्यों के योगदान की सराहना करने वाली एक पुरानी पुस्तक (1993) के अपडेटेड संस्करण के लिए मूल लेख देने का आग्रह किया गया था। सचिवालय का उद्देश्य महिला सांसदों के ऐतिहासिक योगदान को दस्तावेजी रूप देना था, लेकिन रिकॉर्ड्स को अपडेट न करने की वजह से यह सार्थक प्रयास विवादों में घिर गया।

