उत्तराखंड सिंचाई विभाग की बड़ी कार्रवाई: हड़ताल पर अड़े 134 इंजीनियरों को सेवा समाप्ति का नोटिस

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उत्तराखंड के सिंचाई विभाग ने पिछले कई दिनों से हड़ताल पर चल रहे 134 कनिष्ठ इंजीनियरों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए उन्हें ‘कारण बताओ’ नोटिस जारी किया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि हड़ताल खत्म कर काम पर वापसी नहीं की गई, तो इन इंजीनियरों की सेवाएं समाप्त कर दी जाएंगी। प्रमुख अभियंता सुभाष चंद्र की ओर से जारी इस नोटिस ने डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ के बीच हड़कंप मचा दिया है। शासन ने इस हड़ताल को अनुशासनहीनता और राजकीय हित के विपरीत माना है।

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परिवीक्षा अवधि (Probation Period) वाले इंजीनियरों पर गाज

विभाग ने विशेष रूप से उन इंजीनियरों को निशाने पर लिया है जिनकी नियुक्ति सितंबर 2024 में हुई थी। ये इंजीनियर अभी अपनी 2 साल की परिवीक्षा अवधि पर हैं। विभाग ने इनसे पूछा है कि सेवा शर्तों का उल्लंघन करने के कारण क्यों न उनकी सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी जाएं। सरकारी नियमों के अनुसार, प्रोबेशन पीरियड के दौरान हड़ताल में शामिल होना कर्मचारी आचरण नियमावली का सीधा उल्लंघन है।

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हड़ताल का व्यापक असर: पेयजल संकट की आहट

23 मार्च से जारी इस हड़ताल के कारण सिंचाई विभाग की महत्वपूर्ण परियोजनाओं का काम पूरी तरह ठप हो गया है। इसमें सिविल शाखा के 74 और मैकेनिकल शाखा के लगभग 60 इंजीनियर शामिल हैं। इस विरोध प्रदर्शन का असर अब जल निगम के कामों पर भी दिखने लगा है। जल निगम के अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि यह हड़ताल लंबी खिंची, तो राज्य में पेयजल आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हो सकती है, क्योंकि कई निर्माणाधीन योजनाओं के संचालन की जिम्मेदारी इन्हीं इंजीनियरों के पास है।

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अनुशासनहीनता पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी

सरकार ने साफ कर दिया है कि जनता से जुड़े जरूरी कामों को रोककर हड़ताल करना कतई स्वीकार्य नहीं है। विभाग ने सभी आंदोलनकारी इंजीनियरों को अपना स्पष्टीकरण तत्काल उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। अधिकारियों का मानना है कि इस सख्ती से न केवल अनुशासन बहाल होगा, बल्कि ठप पड़ी विकास योजनाओं को भी दोबारा गति दी जा सकेगी।

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