किसान आत्महत्या प्रकरण के बीच एसएसपी बदलने की तैयारी, महाराष्ट्र के एक नेता कर रहे चहेते को कुर्सी पर काबिज कराने के लिए लॉबिंग : सूत्र

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देहरादून। उधमसिंह नगर जनपद के पुलिस कप्तान की कुर्सी अभी औपचारिक रूप से खाली भी नहीं हुई है, लेकिन उससे पहले ही इस पद को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में जबरदस्त उठा-पटक शुरू हो गई है। सूत्रों की मानें तो महाराष्ट्र लॉबी पूरी तरह सक्रिय हो चुकी है और इस महत्वपूर्ण जिले की एसएसपी कुर्सी पर अपने पसंदीदा अधिकारी को बैठाने के लिए जोर-आजमाइश तेज कर दी गई है। हालात यह हैं कि महाराष्ट्र के बड़े नेता भी इस जनपद के लिए “लॉबिंग” कर रहे हैं, ताकि गढ़वाल क्षेत्र में तैनात एक अधिकारी को उधमसिंह नगर की कुर्सी पर काबिज कराया जा सके।
उधम सिंह नगर उत्तराखंड का ऐसा जिला है, जहां कानून-व्यवस्था के साथ-साथ राजनीतिक और किसान आंदोलनों की संवेदनशीलता हमेशा बनी रहती है। यही वजह है कि यहां के पुलिस कप्तान की कुर्सी को बेहद अहम माना जाता है। जानकारों का कहना है कि इस कुर्सी पर बैठने वाला अधिकारी न केवल प्रशासनिक दृष्टि से मजबूत होता है, बल्कि राजनीतिक रूप से भी प्रभावशाली भूमिका में आ जाता है। ऐसे में महाराष्ट्र लॉबी की दिलचस्पी केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि राजनीतिक लाभ से भी जुड़ी मानी जा रही है।
दरअसल, जिले में हाल ही में किसान की आत्महत्या का मामला सामने आया है, जो अभी जांच के दायरे में है। यह मामला प्रशासन और पुलिस दोनों के लिए संवेदनशील बना हुआ है। भले ही इस पूरे प्रकरण में मौजूदा पुलिस कप्तान मणिकांत मिश्रा की भूमिका को लेकर अभी कोई ठोस निष्कर्ष सामने नहीं आया है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें हटाने की कवायद शुरू हो चुकी है। सूत्रों का दावा है कि किसान आत्महत्या के मामले को आधार बनाकर पुलिस कप्तान को जिम्मेदार ठहराने की कोशिशें की जा रही हैं, ताकि कुर्सी खाली कराई जा सके। इस उठा-पटक ने यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि क्या जांच पूरी होने से पहले ही किसी अधिकारी को हटाने का दबाव बनाना उचित है। प्रशासनिक जानकारों का कहना है कि यदि किसी भी मामले में अधिकारी की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है, तो कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन केवल लॉबी या राजनीतिक दबाव के आधार पर तबादले की परंपरा सिस्टम की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करती है। फिलहाल यह पूरा मामला भविष्य के गर्भ में है कि किसान आत्महत्या प्रकरण की जांच किस दिशा में जाती है और पुलिस कप्तान मणिकांत मिश्रा की भूमिका को लेकर क्या निष्कर्ष निकलता है। लेकिन इतना तय माना जा रहा है कि उधम सिंह नगर की एसएसपी कुर्सी को लेकर एड़ी-चोटी का जोर लगाया जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार और गृह विभाग इस दबाव की राजनीति के आगे झुकते हैं या फिर तथ्यों और जांच के आधार पर कोई फैसला लेते ।

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