दून मेडिकल कॉलेज में रैगिंग का मामला पहुंचा NMC: पीड़ित PG डॉक्टर का बदला विभाग, मेंटर भी तैनात

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देहरादून। दून मेडिकल कॉलेज के एनोटॉमी विभाग में पीजी डॉक्टर के साथ सीनियर्स द्वारा रैगिंग, प्रताड़ना और टॉक्सिक व्यवहार का मामला में एंटी-रैगिंग समिति की रिपोर्ट और प्राचार्य स्तर पर हुई सुनवाई के बाद कॉलेज प्रशासन ने पीड़ित छात्र को दो माह के लिए सर्जरी विभाग में स्थानांतरित कर दिया है। इसके साथ ही पीड़ित डॉक्टर के मार्गदर्शन और सहयोग के लिए एक वरिष्ठ फैकल्टी को बतौर मेंटर नियुक्त किया गया है।

NMC में शिकायत के बाद हरकत में आया प्रशासन

यह पूरा मामला तब गरमाया जब विभाग स्तर पर उचित सुनवाई न होने से क्षुब्ध होकर पीड़ित छात्र ने सीधे नेशनल मेडिकल कमीशन में लिखित शिकायत दर्ज करा दी। एनएमसी में मामला दर्ज होते ही दून मेडिकल कॉलेज प्रशासन में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में जांच शुरू की गई। पीड़ित डॉक्टर का आरोप है कि सीनियर डॉक्टर्स का रवैया बेहद क्रूर था। मामूली बातों और पानी पीने जैसी सामान्य वजहों पर भी सीनियर्स भड़क जाते थे और उसे मानसिक रूप से धमकाते थे।

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‘सीनियर्स के संपर्क में नहीं रहूंगा’- पीड़ित छात्र की दो टूक

एंटी-रैगिंग समिति के समक्ष उपस्थित होकर पीड़ित छात्र ने स्पष्ट किया कि टॉक्सिक व्यवहार करने वाले सीनियर्स किसी भी हाल में उसके संपर्क में न रहें। छात्र ने दो टूक कहा कि जब तक ऐसी सुरक्षात्मक व्यवस्था नहीं होती, वह अपनी शिकायत वापस नहीं लेगा। छात्र के कड़े रुख के बाद प्रशासन ने उसकी पोस्टिंग सर्जरी विभाग में की और आरोपी सीनियर डॉक्टर्स को सख्त चेतावनी जारी कर दी है।

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जांच के दौरान एनोटॉमी विभाग की फैकल्टी के बीच आपसी समन्वय की कमी भी उजागर हुई है। प्राथमिक स्तर पर विभागाध्यक्ष द्वारा इस गंभीर मामले को महज ‘आपसी नोकझोंक’ मानकर टालने का प्रयास किया गया था। इस पर दून मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य ने एचओडी को सख्त नसीहत देते हुए कहा है कि ऐसे संवेदनशील मामलों को कतई हल्के में न लिया जाए और तत्काल उच्चाधिकारियों को सूचित किया जाए।

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कॉलेज की प्राचार्य डॉ. गीता जैन ने बताया कि जांच में वैधानिक रैगिंग का सीधा मामला स्थापित नहीं हुआ है। विवाद की मुख्य वजह पीजी पाठ्यक्रम का अत्यधिक कार्यभार, मानसिक तनाव और आपसी संवाद की कमी पाई गई है। छात्र के हित में उसका विभाग बदला गया है और परिसर में सुरक्षित वातावरण देने का प्रयास जारी है। वहीं, चिकित्सा शिक्षा निदेशक डॉ. आशुतोष सयाना ने प्राचार्य से इस पूरे घटनाक्रम की विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।

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